नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संस्थान में शिक्षा प्रणाली में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग के लाभ, हानियाँ और चुनौतियाँ पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता पेरू के विश्व प्रसिद्ध विधि विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता प्रो0 जॉर्ज इसहाक टोरस मैनरिक रहे।
कार्यक्रम के विधिवत शुभारम्भ करते हुये डा0 विवेक कुमार समन्वयक विधि अध्ययन संस्थान द्वारा वक्ता का परिचय कराया गया। उन्होने वक्ता का संक्षिप्त परिचय देते हुये बताया कि प्रो0 जॉर्ज एक अंतराष्ट्रीय विधिवेत्ता है जिनके द्वारा 19 देशों में 180 से ज्यादा पुस्तके जोकि विधि के विभिन्न आयामो और समसमायिक समस्याओं पर आधारित है प्रकाशित हो चुकी है तथा उनके द्वारा 70 से अधिक शोध पत्र 18 देशों की शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुये है। व्याख्यान के दौरान प्रो0 जॉर्ज इसहाक टोरस मैनरिक ने सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शिक्षा प्रणाली में उपयोगिता और उसके समक्ष चुनौतियों पर प्रकाश डाला। प्रो0 टोरस ने शोध अभिकर्मक को समझाते हुये अभिकर्मक के विभिन्न आयामों पर विस्तृत रूप से छात्र-छात्राओं को अवगत कराया। व्याख्यान में छात्र-छात्राओं को वक्ता द्वारा बताया गया कि कानूनी शोध में पुस्तकों को छात्रों द्वारा मुख्य स्रोत के रूप में प्रयोग करना चाहिये। सूचना प्रौद्योगिकी को मात्र एक सहायक रूप में ही प्रयोग करना चाहिये। यह कानूनी शोध का मुख्य स्रोत नही हो सकता। सूचना प्रौद्योगिकी के समकालीन विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग केवल कानूनी अनुसंधान में सहायक उपकरण के रूप में ही किया जा सकता है।
वक्ता ने बताया कि कृतिम बुद्धिमत्ता द्वारा प्रस्तुत डेटा में पूर्वाग्रह होने की वजह से परिणाम गलत हो सकते है। इसका उदाहरण सहित बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा निर्मित अभिलेखों में काल्पनिक उदाहरण दिये जाते है, जिसे बहुआयामी स्तरों पर चिह्रिन्त किया गया। क्योंकि जो ए0 आई0 टूल सही शोध और अध्ययन का आधार हो सकते है उनकी अधिक कीमत उनको आम छात्रों और शोधार्थियों तक नही पहुंच पाता है। उन्होने साइबर अपराध और साइबर अपराधिकों के गठजोड़ और उसके साइबर उपभेक्ताओं के रिश्तो को इंगित किया। साथ ही उन्होने ए0 आई0 को शैक्षणिक वर्ल्ड में फीड बैक प्राप्त करने का एक अच्छा साधन बताया। प्रो0 जॉर्ज ने तकनीक और मूल अधिकारो के रिश्तो को व्याख्ययित किया। साथ ही साथ उन्होने ए0 आई0 के खतरो जैसे पक्षपात एवं पूर्वग्रह को भी अपनी व्याख्यान का हिस्सा बनाया और उन्होने ए0 आई0 के बेहतर इस्तेमाल हेतु विधिक माप दण्डो के निर्धारण की जोरदार वकालत की और कहा कि एक उचित विधिक वातावरण में तकनीक और शौध दूसरे के पूरक के रूप में एक बेहतर समाज का निर्माण करगें।
वक्ता ने सार्वजनिक नीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर प्रकाश डालते हुये कहा कि इससे प्रशासनिक तंत्र की दक्षता में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने शैक्षणिक प्रतिप्रक्रिया के माध्यम से, छात्रों एवं शिक्षकों की शैक्षणिक प्रगति का आकलन करके शिक्षा प्रणाली में सुधार के नए तरीके भी सुझाए। उन्होंने कुशल शोध प्रक्रिया पर भी बल दिया। शोध कार्य में चुनिंदा पाठ, डिजाइन, तालिकाओं आदि को शामिल करके शोध प्रक्रिया की दक्षता को और सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन आशीष कौशिक द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन डा0 सुदेशना द्वारा किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के शिक्षक डा0 विकास कुमार, डा0 अपेक्षा चौधरी, डा0 धनपाल सिंह, डा0 महिपाल सिंह, डा0 सुनील कुमार शर्मा, डा0 मीनाक्षी एवं समस्त छात्र-छात्रायें एवं शोधार्थी उपस्थिति रहें।

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