Saturday, April 18, 2026

मनसबिया विवाद -चेयरमैन के आदेश पर वक़्फ ट्रिब्यूनल की रोक, मांगा जवाब

सलीम सिददीकी

नित्य संदेश, मेरठ। वक़्फ़ मनसबिया से जुड़े विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। वक़्फ न्यायाधिकरण ने चेयरमैन अली ज़ैदी द्वारा धारा 65 के तहत ज़फ़र सज्जाद को प्रशासक नियुक्त करने के आदेश पर रोक लगा दी है। बता दें कि इस आदेश को अवैधानिक बताते हुए मुतवल्ली दानिश जाफ़री ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामला वक़्फ़ ट्रिब्यूनल के पास सुनवाई के लिए भेज दिया था।इस पर वक़्फ न्यायाधिकरण में तीन सदस्यीय पीठ ने चेयरमैन अली ज़ैदी के आदेश पर रोक लगा दी है। 

सुनवाई के दौरान मुतवल्ली पक्ष के वकील ने कई आपत्तियां जताई थीं। इन आपत्तियों में कहा गया था कि वक़्फ़ मनसबिया सामान्य वक़्फ नहीं है बल्कि वक़्फ़ अलल औलाद है, जिसमें बोर्ड का सीधा हस्तक्षेप क़ानूनन सीमित है। मुतवल्ली के अनुसार उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका था और उन्होंने इसके विस्तार के लिए आवेदन दिया था। ऐसी स्धिति में धारा 65 की कार्रवाई का कोई औचित्य ही नहीं था। बकौल मुतवल्ली पक्ष धारा 65 का प्रयोग केवल मुतवल्ली के कार्यकाल के दौरान अनियमितता या कदाचार साबित होने की स्थिति में ही किया जा सकता है, जबकि उनके खिलाफ ऐसा कोई आरोप था ही नहीं। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि चेयरमैन ने आदेश पारित करते समय उन्हें सुनवाई का अवसर ही नहीं दिया गया, जिसे उन्होंने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया, साथ ही इस तरह का आदेश पारित करने की चेयरमैन की शक्ति पर भी सवाल उठाया गया।

न्यायाधिकरण में चेयरमैन प्रह्लाद सिंह और सदस्य ओमप्रकाश व राम सुरेश वर्मा की पीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए कहा कि चेयरमैन के आदेश पर स्थगन दिया जाता है और मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए भी कहा। कहा गया कि न्यायाधिकरण जानना चाहता कि चेयरमैन ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर इस तरह का आदेश आख़िर क्यों दिया। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में ट्रिब्यूनल की सुनवाई से तय होगा कि वक़्फ़ बोर्ड की शक्तियां कितनी व्यापक हैं और पारिवारिक वक़्फ़ में उनका हस्तक्षेप कहां तक जायज़ है। मुतवल्ली पक्ष ने फैसले पर संतोष जताया है और इसे न्याय की जीत कहा है।

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