Thursday, April 2, 2026

श्री बजरंग बली पर जीवन प्रकाश आर्य (म.प्र. शिक्षा समिति स्थाई सदस्य) की भक्तिमय कविता...



नित्य संदेश ब्यूरो

नर वानर बजरंग बली 
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जिसने शैशव में ही सौर ज्ञान को 
हृदयंगम कर निगल लिया था ।
जिसनेपुरंदर का विनाषक
वज्र घात हंस कर सहा था।
जिसने सत्य न्याय के रण में 
गदा पाणि हो समर किया था 
कौन थे वे ? दिव्य तेजधर 
बलशाली व्यक्तित्व महान ?

उस युग के मानव समाज की
एक प्रणम्य प्रजाति थी वानर।
पुर नगरों के प्रदूषणों से 
बचते थे ये वन में रह कर।
चंचल गति मति के परिचायक।
बीहड़ वन और मुक्त  पवन की  
संतानें थीं, ये यायावर  ।
इसी जाति के धर्म धुरंधर 
आप स्वयं हैं हे गतिमान ? 
बलशाली  *****   1

सूत्र व्याकरण के संज्ञाता,
आश्रित मित्रों के परित्राता,
शत योजन सागर तर कर  के,
जिसने शोधीं सीता माता ।
मैनाक मेरु, सुरसा  बाधा को 
हरने वाले, कौन आप 
ब्रह्मज्ञ मतिमान ?,
बलशाली *****    2

सुग्रीव,  विभीषण के अंगद के 
धर्म मार्ग मे तुम सहयोगी ।
लंका पुर की सुदृढ सुरक्षा
अग्निसात् किसने की होगी ?
ध्येय मार्ग  के सतत पथिक तुम,
सर्व सिद्ध साधक और योगी ।
आप कौन हैं हे बलवान ? 
बलशाली  ******   3

भद्र राम के, धर्म सुरथ के,
धीर वीर अप्रतिरथ सुसारथी 
भक्ति , समर्पण में सेवा में,
रामानुज  के अप्रतिम साथी । 
किसने अब तक थाम रखी है 
रामभक्ति की पावन थाती ।
किसने हर म्रियमाण  हृदय  में,
किया चेतना का आधान ।
बलशाली  ******  4

जिसके हाथों के कौशल से 
धातु गदा दिखलाती लाघव ।
जिसके निश्छल भक्ति प्रेम से  
बिना मूल्य बिक जाते राघव ।
जिसने अनथक तप श्रम करके 
रचा गढा था तन का सौष्ठव । 
जो शिवशंकर  के सुशिष्य हैं 
रवि को जिन पर है अभिमान 
वही आप हैं, नरपुंगव बजरंगी
केसरी नंदन 
जय हनुमान ? *****   5

     ‌‌ ‌            मैं 
           हनुमान भक्त 
                जीवन

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