Wednesday, March 11, 2026

सीसीएस विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन SCRIET-2026 का आयोजन

नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के सर छोटू राम इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (SCRIET) में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Scientific Collaboration on Research, Innovation, Education and Technology (SCRIET-2026)” का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन समारोह कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। यह सम्मेलन 11-12 मार्च 2026 को अटल सभागार, सीसीएस विश्वविद्यालय, मेरठ में हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया।

सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रो. बीरपाल सिंह, डॉ. दिलराबो एर्नाजारोवा और प्रो. दिनेश कुमार सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र में डॉ. नीरज सिंघल, निदेशक SCRIET, ने विश्वविद्यालय और संस्थान की शैक्षणिक, तकनीकी और शोध गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि SCRIET और CCS विश्वविद्यालय ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा, नवाचार और शोध के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन्नत भारत अभियान (UBA) का महत्व बताया और इसे छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभवात्मक और सामाजिक सीख का अवसर बताया।

UBA भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, स्वच्छता और डिजिटल जागरूकता को बढ़ावा देना है। इसका मिशन है ग्रामीण क्षेत्रों में सतत सुधार लाना, समाज में नवाचार को बढ़ावा देना, छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को अनुभव आधारित शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का अवसर देना, ग्रामीण समुदायों को स्वावलंबी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना और विश्वविद्यालयों तथा उद्योग के बीच वैज्ञानिक सहयोग और अनुभव साझा करने का मंच तैयार करना।

डॉ. अशुतोष मिश्रा, समन्वयक UBA सेल, ने कहा कि UBA के माध्यम से छात्र सीधे ग्रामीण समुदायों से जुड़कर सीखते हैं और अपने नवाचारों के जरिए समाज में बदलाव लाते हैं। इससे न केवल छात्रों का ज्ञान बढ़ता है बल्कि ग्रामीण समाज का भी विकास होता है।

प्रोफेसर आर.के. सोनी, प्रोफेसर इंचार्ज SCRIET, ने कहा कि यदि भारत को सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाना है तो इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों का विकास अनिवार्य है। भारत को सही रूप में समझने के लिए गांवों की समस्याओं और संभावनाओं को समझना बहुत जरूरी है।

प्रो. बीरपाल सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक है और NIRF रैंकिंग में शीर्ष 50 में शामिल है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और शिक्षा में निरंतर प्रगति कर रहा है और छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अवसर प्रदान कर रहा है।
प्रो. दिनेश कुमार, मुख्य वार्डन, ने सम्मेलन की सफलता और विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों—जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश—के शोधकर्ताओं के साथ-साथ उज़्बेकिस्तान से भी विशेषज्ञ शामिल हुए। डॉ. दिलफूज़ा जब्बोरोवा ने कहा कि बायोचार कृषि में क्रांतिकारी तकनीक है। यह फसल की वृद्धि को बढ़ाता है और लवणीय तनाव जैसी कठिन परिस्थितियों में भी पौधों को मजबूती प्रदान करता है। अल्फाल्फा, अमरनाथ और मक्का में इसके प्रभाव ने नए शोध अवसर दिए हैं।

डॉ. इल्हाम कुर्बानोव ने सोयाबीन संग्रह की जैव-रासायनिक विविधता और शारीरिक गुणों पर अपने शोध निष्कर्ष साझा किए। अन्य विशेषज्ञों ने बैक्टीरियल स्ट्रेन्स, अरबसकुलर माइकोराइजा और सूखे की स्थिति में फसल उत्पादन बढ़ाने के परिणाम प्रस्तुत किए। डॉ. दिलराबो एर्नाजारोवा ने पौध जीनोमिक्स से संबंधित अपने शोध कार्य साझा किए और डॉ. ओ.आर. एर्गाशोव ने कपास के जीनोटाइप्स में कृषि गुणों के अंतर की अभिव्यक्ति पर अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों में डॉ. ममुरा मुतालोवा, डॉ. नुराली ओरंशबेव, डॉ. फरुजा रफीएवा, बोबुरबेक अखमादालियेव, गुल्योरा इस्माइलोवा, डॉ. नोरमुमिन सानाएव, डॉ. ओरिफ एर्गाशेव, पीएचडी जालोलिद्दीन शाकीरोव, डॉ. दिलरुबा एरगाशेवा, डॉ. सोदिर मेलियेव और दिलफूज़ा इस्माइलोवा शामिल रहे।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के सफल आयोजन में आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कांवीनर डॉ. अशुतोष मिश्रा ने पूरे कार्यक्रम के समन्वय और मार्गदर्शन में मुख्य भूमिका निभाई। को-कॉन्वीनर डॉ. स्वाती सिंह और डॉ. शोभित सक्सेना ने शैक्षणिक गतिविधियों और आयोजन संबंधी कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. कुंकुम ने कार्यक्रम संचालन और व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया और जॉइंट सेक्रेटरी डॉ. रंजू अरोड़ा ने कार्यक्रम के समन्वय और व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित किया।

दो दिवसीय सम्मेलन में छात्र और शोधकर्ता UBA की गतिविधियों और ग्रामीण विकास प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनकर अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। इससे उन्हें वैश्विक शोध, नवाचार और तकनीकी कौशल सीखने का अवसर मिला है। वहीं ग्रामीण समाज में तकनीकी और शैक्षणिक सुधारों का प्रत्यक्ष लाभ भी पहुंच रहा है।

SCRIET-2026 सम्मेलन ने छात्रों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों को वैश्विक स्तर पर साझा ज्ञान, नवाचार और ग्रामीण भारत के विकास के अनुभव प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया है।

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