नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। विज्ञान को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित “विज्ञान घर” के पांचवें दिन प्रतिभागियों ने विभिन्न टीमों में विभाजित होकर कई रचनात्मक और वैज्ञानिक गतिविधियों में भाग लिया। सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक समूह गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनका लाइव प्रसारण भी किया गया।
इन गतिविधियों में बच्चों ने न केवल प्रयोग किए, बल्कि “जीरो वेस्ट” और सतत जीवनशैली की अवधारणा को भी समझा। पेपर रीसाइक्लिंग गतिविधि में लकी, रीति, शौर्य और नितेश की टीम ने पुराने कागजों को पानी में भिगोकर पल्प तैयार किया और उसे नए कागज के रूप में ढालने की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया। इस गतिविधि के माध्यम से उन्होंने यह समझाया कि कागज को दोबारा उपयोग में लाकर पेड़ों की कटाई को कम किया जा सकता है और पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है। शिल्पकारी गतिविधि में अग्रता और खुशी ने बेकार एवं अनुपयोगी वस्तुओं से सुंदर और उपयोगी उत्पाद तैयार किए।
उन्होंने दिखाया कि साधारण सामग्री जैसे कपड़े के टुकड़े, कागज और अन्य वस्तुओं का उपयोग कर रचनात्मक तरीके से नई चीजें बनाई जा सकती हैं, जिससे कचरे को कम किया जा सकता है। “वेस्ट टू बेस्ट” गतिविधि में सारा, तनुश्री, उत्कर्ष, नागा फाल्गुन और बहिरतन की टीम ने प्लास्टिक, कागज और अन्य घरेलू कचरे को उपयोगी वस्तुओं में परिवर्तित किया। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य यह बताना था कि कचरा केवल फेंकने की चीज नहीं है, बल्कि सही सोच और नवाचार से उसे संसाधन में बदला जा सकता है। बायोगैस गतिविधि में महक, हृदय, राघव और युवन की टीम ने जैविक कचरे से ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया को समझाया। उन्होंने मॉडल के माध्यम से बताया कि रसोई के अपशिष्ट जैसे सब्जियों के छिलके और अन्य जैविक पदार्थों को एक बंद टैंक में डालकर गैस तैयार की जा सकती है, जिसका उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है।
यह ऊर्जा का एक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल स्रोत है। जीरो वेस्ट टॉयलेट गतिविधि में मंजूर अली, श्रेष्ठ, लहरी और अनन्या की टीम ने बिना पानी के उपयोग वाले शौचालय का मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली में मानव अपशिष्ट को एकत्र कर उसमें राख, मिट्टी और सूखे पदार्थ मिलाकर उसे जैविक खाद में परिवर्तित किया जाता है। यह प्रणाली विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी है जहाँ पानी की कमी होती है और इससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।
इसके अतिरिक्त शाम 4 से 5 बजे तक एक विशेष गतिविधि का लाइव प्रदर्शन किया गया, वहीं रात 7 से 8 बजे तक आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने अपने-अपने राज्यों की संस्कृति, नृत्य और गीतों के माध्यम से प्रस्तुति दी, जिससे कार्यक्रम में उत्साह और विविधता का वातावरण बना रहा।
पूरे दिन की गतिविधियों के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि “विज्ञान घर” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है जहाँ विद्यार्थी टीम वर्क, नवाचार और वैज्ञानिक सोच के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझ रहे हैं।
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