नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई-1 एवं इकाई-2 के स्वयंसेवकों द्वारा विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान नुक्कड़ नाटक, जनसंपर्क एवं विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण और गौरैया के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।
एनएसएस इकाई-1 के स्वयंसेवकों द्वारा ग्राम गुम्मी-जुर्रानपुर में 16 मार्च से 22 मार्च 2026 तक सात दिवसीय विशेष दिन-रात शिविर का आयोजन कार्यक्रम अधिकारी श्री राम प्रकाश तिवारी के नेतृत्व में किया जा रहा है। शिविर का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक जागरूकता फैलाना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना तथा विद्यार्थियों में सेवा भावना का विकास करना है। शिविर के पाँचवें दिन विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर स्वयंसेवकों ने एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इस नाटक के माध्यम से गौरैया की घटती संख्या और उसके पीछे के कारणों—जैसे बढ़ता प्रदूषण, कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग, बदलती जीवनशैली और प्राकृतिक आवासों के विनाश—को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया। स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे स्वच्छ वातावरण बनाए रखें, अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाएँ तथा रासायनिक पदार्थों का सीमित उपयोग करें, ताकि गौरैया सहित अन्य पक्षियों का संरक्षण संभव हो सके।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान दारा सिंह ने स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल ग्रामीणों के लिए प्रेरणादायक है और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। कार्यक्रम में सुजीत भड़ाना, सतीश, संजय, प्रताप, हर्ष, शिवम, मनीषा, राकेश, मुस्तफा, इमान सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे। शिविर के अंतर्गत स्वयंसेवकों को विभिन्न समूहों में विभाजित कर गांव के अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा गया, जहां उन्होंने लोगों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
इसी क्रम में एनएसएस इकाई-2 द्वारा कार्यक्रम अधिकारी निशांत गौरव के नेतृत्व में ग्राम टिकरी में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत स्वयंसेवकों ने स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सरकारी योजनाओं के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया। घर-घर जाकर संवाद स्थापित करते हुए उन्होंने स्वच्छ वातावरण बनाए रखने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने तथा बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का संदेश दिया। दोनों इकाइयों के संयुक्त प्रयासों से ग्रामीणों में पर्यावरण संरक्षण, गौरैया के महत्व तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सकारात्मक जागरूकता देखने को मिली। ग्रामीणों ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन स्वयंसेवकों द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

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