नित्य संदेश ब्यूरो
नोएडा। सनफीस्ट के बाउंस ऑफ़ जॉय कार्यक्रम के एक साल का सफर दिल्ली-एनसीआर में एक शानदार समारोह के साथ पूरा हुआ। समाज को सेहतमंद और आत्मविश्वासी बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस कार्यक्रम के माध्यम से खेलकूद और शारीरिक व्यायाम के महत्व पर अधिक बल दिया गया। इस कार्यक्रम का समापन दिल्ली एनसीआर में आयोजित एक समारोह के साथ हुआ। यह पहल सनफीस्ट बाउंस ब्रांड के सिद्धांतों के अनुरूप है, जो बच्चों के बीच मैदान में खेले जाने वाले खेलों को बढ़ावा देता है। इसका उद्देश्य खेलकूद को स्कूलों और समुदायों का हिस्सा बनाना है, जिससे शारीरिक तंदुरुस्ती बेहतर हो, वे जीवन के जरूरी हुनर सीखें और लड़के एवं लड़कियों को सही पोषण के साथ-साथ बराबरी का मौका मिले।
आईटीसी लिमिटेड में बिस्किट और कन्फेक्शनरी, बीयू की चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव, कविता चतुर्वेदी ने कहा आईटीसी में हम मानते हैं कि खेलकूद बच्चों के सर्वांगीण विकास में एक बहुत बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। 'सनफीस्ट बाउंस ऑफ़ जॉय' पहल के ज़रिए, हमारा उद्देश्य बच्चों और समुदायों को शारीरिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे इनमें भाग लेने के साथ-साथ टीम वर्क, आत्मविश्वास और नेतृत्व जैसे जरूरी गुण भी सीख सकें। हमारा मानना है कि पढ़ाई-लिखाई के साथ खेलकूद भी बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। ‘सनफीस्ट बाउंस ऑफ़ जॉय’ कार्यक्रम बच्चों में खेलों के प्रति जुनून जगाने के लिए पूरी तरह से तैयार है, और उन्हें खेलों को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करेगा।“इस कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए, भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉलर ज्योति चौहान ने कहा, "खेलकूद बच्चों को सेहतमंद बनाने के साथ-साथ आत्मविश्वास से भरे और अनुशासित बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। 'सनफीस्ट बाउंस ऑफ़ जॉय' जैसी पहल उन बच्चों को खेलकूद के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करती है, जिन्हें आम तौर पर ऐसी सुविधाएं नहीं मिल पातीं। ऐसे कार्यक्रम लड़कियों सहित युवाओं को खेलकूद में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करके न केवल उनके व्यक्तित्व को निखारते हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अहम योगदान देते हैं।"
पढ़ाई-लिखाई में शारीरिक गतिविधि की अहमियत पर ज़ोर देते हुए, सशक्त फाउंडेशन के सीईओ प्रतीक कुमार ने कहा, "अक्सर खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों को पढ़ाई-लिखाई के मुकाबले कम ज़रूरी माना जाता है। हालाँकि, शोध के नतीजे बताते हैं कि बच्चों के सही विकास और अच्छी पढ़ाई-लिखाई के लिए कायदे से खेलना-कूदना बहुत ज़रूरी है। शारीरिक गतिविधियों से पढ़ाई में मन लगाने के अलावा बच्चों की याददाश्त और मुश्किलों को हल करने की क्षमता बढ़ती है। इससे छात्रों को पढ़ाई पर अच्छी तरह ध्यान लगाने और कक्षा की हर गतिविधि में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने में मदद मिलती है।" दिल्ली-एनसीआर के मयूर विहार फेज़ III में स्थित सेंट मैरी स्कूल में इस साल के आखिरी टूर्नामेंट का आयोजन किया गया, जिसमें सरकार, खेल जगत और समुदाय के मुख्य लोगों ने एकजुट होकर पिछले एक साल में इस कार्यक्रम की उपलब्धियों का जश्न मनाया। कार्यक्रम में भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉलर ज्योति चौहान ने भी भाग लिया, जो राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और क्रोएशिया के महिला फुटबॉल क्लब ‘दिनामो ज़गरेब’ (2023–24) के लिए भी खेल चुकी हैं।
इस कार्यक्रम का लक्ष्य 250 स्कूलों के 1 लाख से ज्यादा बच्चों तक पहुँचना है। इसके अलावा, पाँच जिलों में, यानी उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर और सहारनपुर, बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर और मुंगेर, और झारखंड के राँची में 1.2 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों पहले ही इसका लाभ प्राप्त कर चुके हैं। इस पहल के तहत खेल का सामान उपलब्ध कराया जा रहा है, अनुभवी कोच बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं और स्कूलों के शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की क्षमता को भी और बेहतर बनाया जा रहा है। समापन समारोह में स्कूल के प्रधानाचार्य, शिक्षकों, छात्रों और समुदाय के बुज़ुर्गों सहित महिलाएँ भी शामिल थीं; उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और इस कार्यक्रम से उनके स्कूलों और समुदायों पर पड़े सकारात्मक प्रभाव के बारे में भी चर्चा की।
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