Tuesday, March 17, 2026

नव नूतन संवत्सर

नित्य संदेश। इस शाश्वत सनातन सृष्टि के सृजन का प्रथम दिवस । अनेक मंगल प्रसंगो से परिपूर्ण दिवस । कालगणना के क्षेत्र में हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का परिचायक दिवस ।
 यह हमारा वर्ष प्रतिपदा पर्व, 
आप सभी के लिए मंगल मय हो । 
वर्ष प्रतिपदा
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आओ,
नव नूतन संवत्सर ,
स्वर्णिम स्वप्न  
लिये अंजुरि भर 
ऋतु अनुकूल , 
पवन मधुपूरित ।
नवल धान्य  
बिखरा धरती पर ।
आओ नव *******

पाद्य , अर्घ्य  
और आचमनीय से 
अभिनंदन है 
नवल दिवाकर। 
आगत और 
विगत कल दोनों  
पुष्प वृष्टि 
करते जगती पर ।
अनचीन्ही  
स्मित रेखा से ,
अभिसिंचित  
रक्तिम मधुराधर ।
ऋतुओं का 
सम्राट आ रहा 
बिछा हुआ  
पथ पर पाटम्बर ।
आओ नव ****** 1

शीत शिशिर  
उन्मेष मिट रहा ।
हिम का 
ठिठुरा वेश 
फट रहा ।
शुष्क ठूंठ 
निर्पत्र वृक्ष का 
नव किसलय से 
गात पट रहा ।
मधुमासी रवि की 
यह ऊष्मा 
मन को लगती 
कितनी सुखकर ? 
आओ नव ****** 2

तन और मन 
दोनों उन्मद हैं । 
लास वारुणि 
पूरित नद हैं ।
कंठ कंठ में 
मुखरित , गुंजित ,
रति अनंग के 
प्रेम छंद हैं ।
खोज रहा ,
मुकुलित कलिका को ,
गुन गुन करता 
भ्रमित भ्रमर । 
आओ नव ******* 3

शीत जड़ित 
जड़ चेतन सारे ,
इस ऋतु में 
सक्रिय लगते हैं ।
अवगुण्ठन और 
नीरसता के 
आडंबर 
निष्क्रिय लगते हैं ।
शक्ति संचयन के 
सब उपक्रम 
सार्थक , हितकर 
प्रिय लगते हैं ।
नव स्फूर्ति 
जगाती निशि दिन ,
पृकृति स्वयं 
औषधियां बन कर ।
 आओ नव ****** 4

खेत विपणि ,
नव साज ,सज रहे ।
मन मृदंग ,
उन्मत्त बज रहे ।
द्वेष क्लेश को 
मिटा, हृदय में 
अनुरागी आलाप 
रंज रहे ।
रुष्ट प्रेयसी के 
कपोल से 
छलक रही 
ब्रीड़ा , अति मनहर ।
आओ नव ****** 5

चैत्र मास की 
वर्ष प्रतिपदा , 
कितने 
शुभ संदर्भों वाली । 
बीजा रोपण 
आर्य , संघ का 
चेटिचंड की 
रीत निराली ।
राज्यारोहण 
राम प्रभु का 
प्रथम दिवस यह 
सृष्टि सत्र का ,
दिग् दिगन्त 
दीपित दीवाली । 
सकल सृष्टि में 
अनुनादित हैं
सृष्टि सृजन के 
शाश्वत अक्षर । 
आओ नव ******* 6


                      मैं 
            आर्य स्वयं सेवक 
                   जीवन

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