Sunday, March 22, 2026

आभासी पटल पर वामा साहित्य मंच की अभिव्यक्ति हुई मुखर

सपना सीपी साहू 

नित्य संदेश, इंदौर। आभासी पटल पर वामा साहित्य मंच की संगोष्ठी सम्पन्न हुई। जिसमें देश-विदेश की सदस्याओं ने प्रतिभागिता की। आरंभ में संस्था की अध्यक्ष ज्योति जैन ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि आभासी पटल ने सारे विश्व को एक फ्रेम में ला खड़ा किया है। यही वजह है कि आज हम अपनी सात समंदर पार वाली सखियों को भी देख और सुन पा रहें हैं और उनकी उपस्थिति हमें और अधिक प्रेरणा देती है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भोपाल की जानी-मानी शिक्षाविद और बहु-आयामी व्यक्तित्व की धनी डॉ साधना गंगराड़े रही। उन्होंने कहा कि नीर जीवन है और नारी जीवन को अर्थ देती है। दोनों का स्वभाव एक जैसा है, जिसे जितना रोको वह उतना ही वेग से आगे बढ़ने की कोशिश करते है। 

इस तरंग गोष्ठी में भिन्न विषयों एवं विधाओं में दी गईं प्रस्तुतियों में नारी की संवेदनशीलता, भावप्रवणता के साथ नीर को प्रमुखता से अभिव्यक्ति प्रदान की गई। जया गुप्ता (ग्वालियर ) ने कविता 'चुप्पी उम्र भर की',‌ प्रभा मेहता (नागपुर) कविता 'मैं नारी', सोनम शर्मा ( सिंगापुर), कविता 'एक छोटी सी नदी', अंजू निगम (लखनऊ) हास्य सृजन -'खाना बदोशी का आलम क्या कहिए', रंजना जोशी (खंडवा) , कविता 'नीर', स्वाति जोशी (पुणे) कविता 'नारी नीरमुख्य समान', आरती चित्तौड़ा (उदयपुर) ने नारी और नीर  पर संस्मरण सुनाया। कल्पना दुबे,(खंडवा) कविता 'हां गर्व है मुझे मैं नारी हूं', रेखा भाटिया(अमेरिका), कविता 'कर्म है मेरा', अतुला शर्मा (अमेरिका) ने कविता 'अपने शहर में' सुनाई। 


विभा भटोरे (इंदौर) ने हांड‌ई माता की जिजीविषा को रेखांकित किया वहीं सरला मेहता (इंदौर) ने जो 'कह नहीं पाई, पाती ने किया बयां' कह कर अपनी बात रखी। रुपाली पाटनी ने अपनी हास्य रचना 'चक्कर एक्सपायरी डेट का', 'ऋतु सक्सेना ने यों कह कर अपनी बात कही 'नारी बिन घर सूना सूना/जैसे चीनी बिन चाय'।

मालवी में माया बदेका द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से आरंभ हुए कार्यक्रम का संयोजन रुपाली पाटनी, संचालन ऋतु सक्सेना तथा आभार डॉ. शोभा प्रजापति ने ज्ञापित किया। 

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