नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के उद्यमिता एवं विकास प्रकोष्ठ, शिक्षा विभाग में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय तथा निर्माण उद्योग विकास परिषद नई दिल्ली के संयोजन में एक एक सप्ताह का प्रबंधन विकास कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा एवं विश्वविद्यालय के सीईओ प्रो. (डॉ.) शल्या राज ने कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. इंदिरा सिंह ने विद्यार्थियों को भविष्य के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा संचालित लघु परियोजनाओं पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया।कार्यक्रम के प्रथम दिन की शुरुआत डॉ. अनोज राज (प्रोफेसर, विभाग शिक्षा) द्वारा औद्योगिक प्रबंधन के परिचय से हुई, जिसमें उन्होंने बताया कि यह प्रबंधन प्रणाली विभिन्न संसाधनों के समन्वय के लिये आवश्यक है। इसके बाद डॉ. भुवनेश शर्मा ने उत्पादन, योजना एवं नियंत्रण पर व्याख्यान देते हुए उत्पादकता और दक्षता के महत्व को रेखांकित किया।
दूसरे दिन डॉ. मुमताज शेख ने मानव संसाधन प्रबंधन विषय पर व्याख्यान दिया, जबकि डॉ. रूपम जैन ने प्रदर्शन मूल्यांकन की प्रक्रिया और उसके लाभों पर प्रकाश डाला। तीसरे दिन डॉ. रूबी ने विपणन प्रबंधन का परिचय देते हुए बताया कि विपणन से बाजार अनुसंधान और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होता है। इसके बाद डॉ. रीबा देवी ने सोशल मीडिया मार्केटिंग और उसके व्यापारिक प्रभाव पर चर्चा की। चौथे दिन डॉ. रेशु रानी द्वारा सामग्री प्रबंधन और डॉ. भुवनेश शर्मा द्वारा गुणवत्ता प्रबंधन विषय पर व्याख्यान हुआ, जिसमें संसाधनों के अधिकतम उपयोग तथा गुणवत्ता के प्रभाव का सम्यक वर्णन प्रस्तुत किया गया। पाँचवें दिन वैशाली सैनी ने फाइनेंशियल मैनेजमेंट का परिचय देते हुए बजटिंग और वित्तीय योजना पर चर्चा की तथा रागिनी श्रीवास्तव ने इन्वेंट्री कंट्रोल के लाभ व प्रबंधन पर व्याख्यान दिया। अंत में डॉ. अनोज राज ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय कार्यक्रम की भूमिका और उद्यमिता के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पर अपने विचार साझा किये। सम्पूर्ण कार्यक्रम का समन्वय डॉ. भुवनेश शर्मा द्वारा किया गया, जिसमें कुल 30 छात्रों एवं 9 संकाय सदस्यों ने भाग लिया और लाभ प्राप्त किया।
एक अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बौद्धिक संपदा अधिकारों पर तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला संपन्न हुई। विश्वविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ अंतर्गत आईपीआर सेल द्वारा “बौद्धिक संपदा अधिकार: पेटेंट, कॉपीराइट एवं ट्रेडमार्क” विषय पर तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला अक्स एसोसिएट्स नोएडा एवं संस्थान नवाचार परिषद के सहयोग से आयोजित हुई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य संकाय सदस्यों एवं शोधकर्ताओं में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, अनुसंधान एवं नवाचार से जुड़े कानूनी संरक्षण की समझ विकसित करना तथा व्यावहारिक दक्षताओं को सुदृढ़ करना रहा। इस पहल के माध्यम से विश्वविद्यालय में नवाचार-अनुकूल एवं अनुसंधान-केंद्रित शैक्षणिक वातावरण को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन अतिरिक्त निदेशक (अनुसंधान) प्रोफेसर डॉ. लुभान सिंह द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने अनुसंधान की गुणवत्ता सुदृढ़ करने, नवाचार को संरक्षित करने तथा अकादमिक संस्थानों में आईपीआर संस्कृति को मजबूत बनाने में बौद्धिक संपदा अधिकारों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। इस अवसर पर अक्श आई पी एसोसिएट्स की सह-संस्थापक मोनिका को आई पी आर जागरूकता एवं क्षमता निर्माण में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. अरुणा बंसल द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यशाला के सभी तकनीकी सत्रों का संचालन मोनिका द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, प्रलेखन एवं फाइलिंग प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी इंटरैक्टिव एवं व्यवहारिक सत्रों के माध्यम से प्रदान की।
तीन दिवसीय कार्यशाला को दिवसवार विषयगत सत्रों में विभाजित किया गया। प्रथम दिवस में आई पी आर की आधारभूत अवधारणाओं, फाइलिंग, संरक्षण एवं व्यावसायीकरण पर चर्चा की गई। द्वितीय दिवस को आई पी आर बूटकैम्प के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें पेटेंट एवं कॉपीराइट फाइलिंग की चरणबद्ध प्रक्रिया, आवश्यक प्रलेखन, प्लेगरिज़्म जाँच एवं सामान्य त्रुटियों से बचाव पर विशेष ध्यान दिया गया। तृतीय दिवस में उन्नत व्यावहारिक प्रशिक्षण के अंतर्गत आविष्कार प्रकटीकरण, पूर्व कला खोज, परीक्षा रिपोर्टों का उत्तर तथा अनुदान पश्चात IPR प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। कार्यशाला में अनुसंधान समन्वयक, आई पी आर समन्वयक, संकाय सदस्य एवं इच्छुक शोधकर्ताओं सहित कुल 36 प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की। सत्रों के दौरान प्रश्नोत्तर एवं खुले संवाद के माध्यम से प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया गया, जिससे उन्हें आई पी आर प्रक्रियाओं की व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई। कार्यशाला के परिणामस्वरूप प्रतिभागियों में आई पी आर फाइलिंग, प्रलेखन, प्लेगरिज़्म रोकथाम एवं नवाचार संरक्षण के प्रति जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई तथा महाविद्यालयों में नवाचार-आधारित अनुसंधान संस्कृति को बल मिला।
कार्यक्रम का समापन डीन–अनुसंधान एवं विकास प्रोफेसर डॉ. वैभव गोयल भारतीया एवं डॉ. निशा राणा, प्रभारी, आई पी आर सेल (कार्यक्रम समन्वयक) द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के प्रति सफल आयोजन हेतु आभार व्यक्त किया। यह तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला अनुसंधान उत्कृष्टता, नवाचार संरक्षण एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ करने की दिशा में विश्वविद्यालय की एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।

No comments:
Post a Comment