नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। पौड़ी हाईवे, पश्चिमी उत्तर प्रदेश—
सर्दियों का सबसे ठंडा दिन, लेकिन संकल्प की सबसे गर्म कहानी। जब ठंडी हवाओं ने पूरे क्षेत्र को जकड़ रखा था और अधिकांश लोग रज़ाई-कंबल में सुकून तलाश रहे थे, तब डॉ. अनिल नौसरान—एक प्रोफेसर, चिकित्सक, पैथोलॉजिस्ट और समर्पित साइक्लिस्ट—ने एक अलग ही मार्ग चुना। उपवास की अवस्था में उन्होंने अपनी साइकिल उठाई और निकल पड़े 101 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण यात्रा पर।
तेज़ सर्दी शरीर को भेद रही थी, पर मन अडिग था। हर पैडल एक साधना बन गया। हर श्वास जागरूकता में बदल गई। यह केवल एक साइकिल यात्रा नहीं थी—यह था “गतिशील ध्यान (Meditation in Motion)”। न यातायात का शोर मन को विचलित कर सका, न शारीरिक कष्ट मानसिक अनुशासन को तोड़ पाया।
**101 किलोमीटर** की इस कठिन यात्रा के पूर्ण होने पर कोई भव्य भोज नहीं था—बस **प्राकृतिक गन्ने के रस के दो गिलास**। सरल, शुद्ध और परिश्रम से अर्जित। यह इस सत्य का प्रतीक था कि **जो शरीर का सम्मान करता है और मन को प्रशिक्षित करता है, प्रकृति उसे अवश्य पुरस्कृत करती है**।
यह यात्रा एक गहरा संदेश देती है—
* उम्र कोई बाधा नहीं
* सर्दी कोई बहाना नहीं
* उपवास कमजोरी नहीं
* और स्वास्थ्य केवल दवाइयों से नहीं मिलता
स्वास्थ्य मिलता है **अनुशासन, जीवनशैली और उद्देश्यपूर्ण गति** से।
डॉ. अनिल नौसरान की यह यात्रा हमें सिखाती है कि जब **मन एकाग्र हो और आत्मा शांत**, तो साल का सबसे ठंडा दिन भी **आंतरिक विजय** का स्मारक बन सकता है।
**कम आराम — अधिक साहस
कम दवाइयाँ — बेहतर जीवनशैली
साइक्लिंग केवल व्यायाम नहीं, यह जीवन का दर्शन है।** 🚴♂️
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