Saturday, March 8, 2025

धरती का एक नाम गोमाता भी हैः शंकराचार्य

 


योगीपुरम में आयोजित देवी भागवत कथा का हुआ समापन

राहुल गौतम

नित्य संदेश, मेरठ। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामीश्रीः अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने देवी भागवत कथा के समापन के मौके पर कहा कि यह संसार अनादि है, जब-जब देवी-देवताओं व मनुष्यों पर विपत्ति आती है, सब देवी परांबा राजराजेश्वरी की सेवा करते हैं। जब भी किसी को पीड़ा होती है तो सब मां को ही याद करते हैं। मां कभी काली, कभी चंडी व कभी तारा बनती है, उद्देश्य केवल अपने बच्चों का कष्ट हरने का होता है।

उन्होंने कथा सुनाते हुए बताया कि दुर्गम नामक राक्षस ने तपस्या की और ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान मांगा। ब्रह्मा जी ने कहा, तुम्ही बताओ कैसे मरोगे। दुर्गम ने कहा कि हम देवता के सिवाय किसी से न मारे जाएं। लेकिन मुझे वद भी चाहिए और वह केवल हमारे पास रहेंगे। ब्रह्मा जी ने कहा तथास्तु और वेद दुर्गम के पास चले गए और उसी समय सभी ब्राह्मणों की स्मृति से भी गायब हो गए। शंकराचार्य जी ने बताया कि सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तब मां काम आती है। राजा सगर के 60 हजार पुत्रों की मौत हो गई, उनकी मुक्ति का कोई उपाय नहीं मिला तो मां गंगा ने कृपा की और गंगा स्वर्ग से धरती पर आ गई। उन्होंने सत्यवान व सावित्री की कथा सुनाते हुए बताया कि किस तरह सावित्री यमराज से भी अपने पति के प्राण वापस ले आई। शंकराचार्य जी ने सभी से कहा कि धार्मिक मामले में कोई भ्रम हो जाए तो उसे स्पष्ट करने का हम वचन देते हैं। शंकराचार्य जी ने माता परांबा की तरफ से सबको खूब-खूब आशीर्वाद दिया। बागपत लोकसभा क्षेत्र से सांसद राजकुमार सांगवान ने महाराज श्री से आशीर्वाद लिया। कथा में आशुतोष डिमरी, दिनेश डिमरी, प्रकाश रावल, इटली से ज्ञानीजी, रोमानिया से शिवांगी, सोबीर नागर, बबलू गुर्जर, नवाब सिंह लखवाया, भारत भूषण प्रजापति, रविन्द्र शर्मा, संजय वर्मा, सुरेन्द्र किनौनी, हितेश गुर्जर, वैभव नागर, अर्पण, स्पर्श, अमित भाटी, पायल, सुमन, चीनू, प्रभा, उमा आदि मौजूद रहे।

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