अनम
शेरवानी
नित्य
संदेश, मेरठ। स्वामी
विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत राहुल सांकृत्यायन सुभारती भाषा
विज्ञान एवं विदेशी भाषा विद्यालय द्वारा फ्रेंच भाषा पर एक जागरूकता कार्यक्रम का
आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और कॉमर्स
के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य फ्रेंच लैंग्वेज
सर्टिफिकेट कोर्स के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता लाना था। यह कार्यक्रम
छात्रों के बीच वैश्विक संचार कौशल को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय की
प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भाषा विभाग द्वारा सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट और कॉमर्स के सभागार में
इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। फ्रेंच भाषा की विशेषज्ञ ज्योति यादव ने फ्रेंच
भाषा में एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया तथा फ्रेंच की बारीकियों के बारे
में उनकी गहरी समझ और शिक्षार्थियों के साथ जुड़ने के फायदे को गंभीरतापूर्वक
समझाया। इससे छात्र-छात्राओं में फ्रेंच भाषा के प्रति वैश्विक भाषा को पढ़ने और समझने
में गहरी रुचि जागृत हुई। सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट और कॉमर्स से डॉ. डाली और डॉ. सबा हाशमी ने
विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में इन भाषाओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि फ्रेंच भाषा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और व्यापार में सबसे व्यापक
रूप से बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है, जो हमारे छात्रों को वैश्विक बाजारों में एक विशिष्ट लाभ
प्रदान करती है। कला और सामाजिक विज्ञान संकाय के अध्यक्ष डॉ. सुधीर त्यागी ने कहा
कि "फ्रेंच भाषा का अध्ययन विविध संस्कृति को समझने, सहानुभूति को बढ़ावा देने और राष्ट्रों के बीच सेतु बनाने
के द्वार खोलता है। ये पाठ्यक्रम केवल अकादमिक पेशकश नहीं हैं;
वे वैश्विक नागरिकों के पोषण के लिए उपकरण
हैं जो आधुनिक दुनिया में जटिलताओं से सहजता और संवेदनशीलता के साथ आधुनिक दुनिया
में निपट सकते हैं।"
भाषा विभाग की अध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा ने कहा कि "वैश्वीकरण के युग में
कई भाषाओं में महारत हासिल करना सिर्फ एक अकादमिक खोज नहीं है,
बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में अनगिनत
अवसरों का प्रवेश द्वार है। सुभारती विश्वविद्यालय में इन भाषा पाठ्यक्रमों की
शुरूआत सशक्तीकरण की दिशा में एक कदम है।" हमारे छात्र अब वैश्विक मंच पर
प्रतिस्पर्धा करेंगे।"
अंग्रेजी भाषा की प्रभारी एवं सह आचार्य डॉ. रफ़त खानम ने कहा कि ये पाठ्यक्रम
व्यापक होने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जो न केवल भाषाई पहलुओं को बल्कि उन सांस्कृतिक संदर्भों को भी शामिल करते हैं
जिनमें इन भाषाओं का उपयोग किया जाता है, जिससे समग्र सीखने का अनुभव मिलता है।”
कार्यक्रम में डॉ. सीमा शर्मा, प्रो. राजेश्वर पाल, डॉ. रफत खानम, डॉ. यशपाल
शर्मा, डॉ. मनीषा लूथरा, स्वाति शर्मा, डॉ. रणवीर सिंह, डॉ. आशीष कुमार
‘दीपांकर’, डॉ. अनुज बावरा, डॉ. फरहा हाशमी और डॉ. निशि राघव का विशेष सहयोग रहा।

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